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इस चुनाव में क्या नोटा डुबोयेग का लोटा

  • रायपुर:- प्रदेश में दो दिन बाद दूसरे चरण के मतदान होने हैं। ऐसे में सभी पार्टियां धुंआधार प्रचार प्रसार में जुटी हुई हैं। सभी प्रत्याशी अपने क्षेत्रों में घर घर जा कर एक एक वोटर से मिलने की जद्दोजहद में दिन रात लगे हैं।

क्या होंगे परिणाम

इस चुनाव में वोटर वोट किसे देंगें या फिर नोटा बटन का उपयोग पिछले विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी होगा। या इस बार स्थिति आलग होगी ये तो परिणाम आने पर ही पता चल पाएगा। इस विषय पर चुनाव एक्सपर्ट की माने तो पिछले विधानसभा चुनाव में नोटा के उपयोग के दो महत्वपूर्ण कारण रहे थे। पहली बार 2013 के चुनाव में EVM में नोटा का प्रयोग हुआ था। इस वजह से लोगों ने उत्सुकता वश नोटा का बटन दबाया और दूसरा कुछ लोगो ने मनचाहे प्रतयाशी नही होने के कारण भी नोटा का उपयोग किया था।

NOTA ने बिगड़ा था खेल

2013 के चुनाव में पूरे प्रदेश में कुल 77 प्रतिशत मतदान हुआ था। जिसमें 3.16 प्रतिशत वोट नोटा में पड़े थे । जिसका असर प्रत्याशियों के हार जीत पर भी पड़ा था। अगर राजधानी की चारों सीटों के आंकड़े देखे तो दो विधानसभा सीटों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा था। रायपुर की ग्रामीण सीट पर 3521 नोटा का उपयोग किया गया। जिसमें भाजपा प्रत्याशी के हार का अंतर मात्र 1821 वोटों का रहा। विधानसभा उत्तर में भी नोटा ने हार जीत का गणित बिगाड़ दिया था। उत्तर में भी 2424 नोटा पर वोट पड़े जबकि यहाँ कांग्रेस प्रत्याशी के हार का मार्जिन 3476 रहा था।

मंत्री के वोट मार्जिन में भी असर

रायपुर की चारों विधानसभा सीटों पर नोटा का कितना असर रहा ये तो देखे तो उत्तर और ग्रामीण के अलावा पश्चिम विधानसभा सीट में भी 2357 नोटा में वोट पड़े जबकि वहां भी जीत का अंतर मात्र 6160 वोटों का ही रहा। जबकि उस सीट से भाजपा के बड़े मंत्री चुनाव के खड़े थे। रायपुर विधानसभा के दक्षिण की सीट भाजपा के लिए सबसे महत्वपूर्ण रहती है। यहाँ से प्रदेश भाजपा के सबसे ऊंचे कद के मंत्री बृजमोहन अग्रवाल चुनाव लड़ते हैं। लेकिन यहाँ भी 2126 वोट नोटा में पड़े थे। हालाकि यहाँ जीत का अंतर बाकी की सीटों से बहुत ज्यादा था। यहाँ जीत का मार्जिन 34799 वोटों का था।

कौन कितने पानी में परिणाम घोषित होने पर पता चलेगा

2013 विधानसभा चुनाव के बाद 2014 लोकसभा चुनाव में नोटा के उपयोग का प्रतिशत भले ही न के बराबर रहा हो। लेकिन इस बार के चुनाव में अपनी जीत को लेकर भले ही दोनो पार्टियां अपने अपने राग अलाप रही हो। चुनाव में जनता का क्या फैसला होगा ये तो परिणाम आने पर ही पता चल पाएगा।

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