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बरसों से बंद राम मंदिर को खोलने रायपुर सांसद रमेश बैस के परिवार को बिलासपुर उच्च न्यायालय में हुई याचिका पर सुनवाई में 4 सप्ताह के अंदर प्रस्तुत करने का आदेश

रायपुरः- राजधानी से महज 35 किलोमीटर दूर चंदखुरी पुराना नाम कौषल पुर जहां भगवान श्री राम का ननिहाल है। वहीं अपने ननिहाल में ही भगवार राम उनके ही लिए बनाए गए मंदिर में कैद हैं। जिसमें वर्तमान सांसद रमेश बैस के परिवार के द्वारा जमीन पर अतिक्रमण करने के कारण यहां भगवान राम के मंदिर में ताला लगा हुआ है। दक्षिण कोसल की राजधानी आरंग के समीप लगभग चार हजार की आबादी वाले गांव चंदखुरी को अयोध्या के राजा दशरथ की सबसे बड़ी रानी कौशल्या का जन्मस्थल माना जाता है।
मंदिर को पुनः खोलने के लिए अब स्वयं मंदिर में स्थित भगवान राम की मूर्ति ने अपने उपासक अमर वर्मा के द्वारा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है। जहां पर प्रकरण की सुनवाई माननीय न्यायाधीश प्रशांत मिश्रा की अदालत में हुई याचिकाकर्ता भगवान राम की मूर्ति की ओर से पैरवी अधिवक्ता अखंड प्रताप पांडे ने की।

बैस परिवार के महेश बैस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री एचबी अग्रवाल के द्वारा इस प्रकरण में पैरवी की गई। उनकी ओर से एक आपत्ति प्रस्तुत कर अवगत कराया गया है कि उक्त मंदिर उनकी निजी संपत्ति है तथा याचिकाकर्ता को याचिका दाखिल करने का कोई अधिकार नहीं है। किंतु न्यायालय ने निवेदन को अमान्य करते हुए याचिका पर विस्तृत जवाब 4 सप्ताह के अंदर प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। प्रकरण में अगली सुनवाई अब 4 सप्ताह बाद होगी

10 परिवारों के द्वारा जमीन अतिक्रमण हेतु राम मंदिर बंद करने मामला महेश बैस की ओर से प्रस्तुत आपत्ती को सुनने के उपरांत महेश बैस को 4 सप्ताह का समय मूर्ति की ओर से दायर की गई याचिका के जवाब हेतु उच्च न्यायालय की ओर से दिया गया है ।

मामले की जानकारी देते हुए याचिकाकर्ता भगवान राम की मूर्ति की ओर से पैरवी अधिवक्ता अखंड प्रताप पांडेय ने बताया कि उन्होंने इस प्रकरण में पंजीयक लोक न्यास के साथ ही पर्यटन एवं राजस्व विभागों को भी पक्षकार बनाया हैए क्योंकि लोक न्यास अधिनियम के अंतर्गत शासन की यह जिम्मेदारी है कि शासकीय भूमि पर स्थित मठों एवं मंदिरों के समुचित रखरखाव का एवं प्रबंधन करें तथा मंदिर एवं उसकी भूमि कोअवैध अतिक्रमण से मुक्त करें साथ मंदिर ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है एवं निश्चित रूप से यह राज्य मैं पर्यटकों को भी आकर्षित करता रहा है ऐसे में शासन किया विधिक बाध्यता है कि वह मंदिर का संरक्षण एवं संवर्धन करें। इस प्रकरण की सुनवाई आज को न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा की अदालत में हो रही है।

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